सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। कुल 24 एकादशियां वर्षभर मनाई जाती हैं, लेकिन हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। इन्हीं में से एक है भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी। माना जाता है कि इस व्रत का पालन करने और कथा का पाठ करने से साधक को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

इस वर्ष अजा एकादशी 19 अगस्त 2025 (मंगलवार) को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत, पूजन और कथा-पाठ करने का विशेष महत्व है।
अजा एकादशी का महत्व
वैदिक मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी व्रत का पालन करने से साधक के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत भक्ति, वैराग्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। पौराणिक कथाएं बताती हैं कि जो भक्त इस दिन श्रीहरि विष्णु की उपासना करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि, यश और शांति का आगमन होता है।
अजा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र एक समय बड़े कष्टों से घिर गए थे। उनका राजपाट छिन गया, पत्नी और पुत्र दूर हो गए, और उन्हें चांडाल बनकर जीवन यापन करना पड़ा। इस कठिन समय में वे दुखी होकर चिंतन कर रहे थे, तभी महान ऋषि गौतम वहां आए।
राजा हरिश्चंद्र ने अपनी व्यथा गौतम ऋषि को सुनाई। तब ऋषि ने उन्हें भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी व्रत करने की सलाह दी।
राजा हरिश्चंद्र ने विधिपूर्वक व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और व्रत कथा का पाठ किया। परिणामस्वरूप उन्हें अपने सारे पापों से मुक्ति मिली, खोया हुआ परिवार और राजपाट वापस मिला। मृत्यु के उपरांत उन्हें श्रीहरि के धाम बैैकुंठ की प्राप्ति भी हुई।
अजा एकादशी पूजा विधि और उपाय
इस दिन पूजा-अर्चना और व्रत का पालन विशेष विधि से करना चाहिए:
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
तुलसी पत्र, पीले पुष्प, फल और मिठाई का भोग अर्पित करें।
अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। बिना कथा के पूजा अधूरी मानी जाती है।
पूरे दिन व्रत का पालन करें और यथाशक्ति अन्न-धन का दान करें।
अजा एकादशी पर दान का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन दान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
मंदिर या जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
तुलसी पत्र और दीपदान से घर में मां लक्ष्मी के शुभ आगमन की मान्यता है।
गरीबों की मदद करने से पापों का नाश और धन लाभ के योग बनते हैं।
अजा एकादशी व्रत से मिलने वाले फल
सभी पापों और संकटों से मुक्ति।
धन, यश और वैभव की प्राप्ति।
पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वास।
मोक्ष की प्राप्ति और श्रीहरि विष्णु की कृपा।
निष्कर्ष
अजा एकादशी का व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमें सत्य, धैर्य और ईमानदारी की राह पर चलना सिखाता है। राजा हरिश्चंद्र की कथा से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर भक्ति और धर्म पालन से असंभव भी संभव हो सकता है।
✍️ अस्वीकरण
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और ज्योतिषीय संदर्भों पर आधारित है। इसमें बताए उपाय केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। इसे अंतिम सत्य या दावा न मानें। पाठकों से अनुरोध है कि अपने विवेक के अनुसार निर्णय लें।
👉 अब आप बताइए — क्या आपने कभी अजा एकादशी या अन्य एकादशी व्रत किया है? क्या आपको लगता है कि व्रत और कथा का पाठ हमारे जीवन को सकारात्मक दिशा देता है?
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