सोशल मीडिया पर अचानक से यह खबर आग की तरह फैल गई कि लोकप्रिय शॉर्ट-वीडियो ऐप टिकटॉक भारत में वापसी कर सकता है। कई उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि वे भारत में टिकटॉक की वेबसाइट को एक्सेस कर पा रहे हैं, जिसके बाद से ही यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि क्या 5 साल के लंबे प्रतिबंध के बाद टिकटॉक फिर से भारतीय बाजार में दस्तक देगा। हालांकि, भारत सरकार ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार शाम को, कई भारतीय उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की कि टिकटॉक की वेबसाइट उनके लिए खुल रही है. यह खबर जंगल की आग की तरह फैली और लोगों के बीच उत्साह और भ्रम दोनों पैदा हो गया। कई लोगों का मानना था कि यह टिकटॉक की वापसी का संकेत हो सकता है. हालांकि, वेबसाइट खुलने के बावजूद, उपयोगकर्ता न तो लॉग इन कर पा रहे थे और न ही कोई वीडियो देख पा रहे थे। इसके अलावा, टिकटॉक ऐप अभी भी गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है.
सरकार का स्पष्टीकरण
इन अफवाहों के जोर पकड़ने के तुरंत बाद, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि टिकटॉक पर लगा प्रतिबंध हटाया नहीं गया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “भारत सरकार ने टिकटॉक के लिए कोई अनब्लॉकिंग आदेश जारी नहीं किया है। ऐसा कोई भी बयान/समाचार झूठा और भ्रामक है”. टिकटॉक के एक प्रवक्ता ने भी पुष्टि की कि कंपनी भारत सरकार के निर्देशों का पालन करना जारी रखे हुए है और भारत में अपनी सेवाओं को बहाल नहीं किया है.
टिकटॉक पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?
भारत सरकार ने जून 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता की चिंताओं का हवाला देते हुए टिकटॉक सहित 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह कदम लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद उठाया गया था, जिसके कारण दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. सरकार का मानना था कि ये ऐप्स “भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए पूर्वाग्रही” गतिविधियों में शामिल थे. खुफिया एजेंसियों ने इन ऐप्स द्वारा उपयोगकर्ता डेटा एकत्र करने और इसे भारत के बाहर सर्वर पर भेजने को लेकर चिंता जताई थी. उस समय भारत में टिकटॉक के लगभग 200 मिलियन उपयोगकर्ता थे, जो इसे इसका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार बनाता था।
भारत-चीन संबंधों में सुधार के बीच उठी अटकलें
यह दिलचस्प है कि टिकटॉक की वापसी की अफवाहें ऐसे समय में उठी हैं जब भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला जैसे सीमा बिंदुओं के माध्यम से व्यापार फिर से शुरू हो गया है. इसके अलावा, दोनों देश सीधी उड़ान कनेक्टिविटी बहाल करने और वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी सहमत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं. इन सकारात्मक घटनाक्रमों के कारण शायद लोगों को लगा कि सरकार टिकटॉक पर लगे प्रतिबंध को हटा सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि टिकटॉक की भारत में वापसी की खबरें महज अफवाहें थीं, जिन्हें सरकारी अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। भले ही कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण वेबसाइट अस्थायी रूप से कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए खुल गई हो, लेकिन ऐप पर प्रतिबंध पहले की तरह ही लागू है. टिकटॉक के भारतीय प्रशंसकों को अभी और इंतजार करना होगा, क्योंकि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है।
Disclaimer: यह समाचार सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
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