चमोली में फटा बादल

उत्तराखंड में कुदरत का कहर: चमोली में फटा बादल, कई घर मलबे में दफन, महिला के फंसे होने की आशंका

नई दिल्ली: देवभूमि उत्तराखंड में मानसून की बारिश एक बार फिर कहर बनकर टूटी है। राज्य के चमोली जिले में शनिवार तड़के बादल फटने से भारी तबाही हुई है। इस आपदा के कारण कई घर और वाहन मलबे में समा गए हैं, और एक महिला के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं और राहत कार्य जारी है। यह घटना उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन और अन्य हादसों की श्रृंखला में नवीनतम है।

चमोली में फटा बादल

मौसम विभाग (IMD) ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और अल्मोड़ा सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ “बहुत तीव्र” बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी दी है। यह अलर्ट शनिवार दोपहर तक प्रभावी रहेगा।

पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और बारिश और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने का आग्रह किया है।

पूरे प्रदेश में बारिश से बिगड़े हालात

चमोली के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त है:

  • पिथौरागढ़: अधिकारियों ने पुष्टि की है कि भूस्खलन के कारण थल-मुनस्यारी और मुनस्यारी-मिलम सड़कों को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।

  • उत्तरकाशी: बुधवार को ही, उत्तरकाशी के डबरानी इलाके में गंगोत्री राजमार्ग पर पहाड़ी से मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया था।

  • हरसिल: हरसिल क्षेत्र में भारी बारिश और मलबे के कारण एक नई झील बन गई है। NDRF और SDRF सहित बचाव एजेंसियां इस झील से पानी निकालने के काम में जुटी हुई हैं।

  • बड़कोट: बड़कोट तहसील के स्यानचट्टी में यमुना नदी का प्रवाह मलबे के कारण अवरुद्ध हो गया है, जिससे नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुस रहा है।

यह घटनाएं दर्शाती हैं कि उत्तराखंड इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है, और प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में पूरी तरह से जुटा हुआ है।

आपकी राय:
उत्तराखंड में बार-बार होने वाली इन प्राकृतिक आपदाओं के बारे में आपकी क्या राय है? इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? नीचे कमेंट सेक्शन में अपने विचार साझा करें।

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