चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

एक युग का अंत: टीम इंडिया की ‘दीवार’ चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा!

हर अच्छी चीज़ का एक दिन अंत होता है। ये शब्द किसी और के नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस चट्टान के हैं, जिसने सालों तक विरोधी गेंदबाज़ों के हौसले पस्त किए। टीम इंडिया की नई ‘दीवार’ के नाम से मशहूर, चेतेश्वर पुजारा ने आज, रविवार को, भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा कर दी है। 37 साल की उम्र में लिया गया यह फैसला भारतीय क्रिकेट में एक युग के अंत का प्रतीक है, खासकर टेस्ट क्रिकेट में, जहाँ पुजारा धैर्य, तकनीक और दृढ़ संकल्प का दूसरा नाम थे।

चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा
चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

सोशल मीडिया पर अपने भावुक पोस्ट के ज़रिए उन्होंने अपने 13 साल के शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम देने का ऐलान किया। यह खबर उस सिलसिले की ताज़ा कड़ी है जिसमें पिछले एक साल में रविचंद्रन अश्विन, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों ने भी टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा है।

भावुक विदाई और दिल छू लेने वाला संदेश

पुजारा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना – इसे शब्दों में बयां करना असंभव है। लेकिन जैसा कि वे कहते हैं, हर अच्छी चीज़ का अंत होता है, और मैं बहुत कृतज्ञता के साथ भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का फैसला कर रहा हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “राजकोट जैसे छोटे शहर के एक लड़के के रूप में, मैंने अपने माता-पिता के साथ सितारों को छूने का लक्ष्य रखा और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देखा। मुझे नहीं पता था कि यह खेल मुझे इतना कुछ देगा – अमूल्य अवसर, अनुभव, उद्देश्य, प्यार, और सबसे बढ़कर अपने राज्य और इस महान राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका।”

आंकड़ों में पुजारा का शानदार करियर

चेतेश्वर पुजारा का नाम जब भी लिया जाएगा, टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान को सुनहरे अक्षरों में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने करियर में कई मील के पत्थर हासिल किए:

  • टेस्ट मैच: 103

  • कुल रन: 7195

  • औसत: 43.60

  • शतक: 19

  • अर्धशतक: 35

पुजारा ने राहुल द्रविड़ द्वारा खाली की गई नंबर 3 की महत्वपूर्ण पोजीशन को बखूबी संभाला। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ सबसे ज्यादा 5-5 शतक लगाए। उनका आखिरी टेस्ट मैच जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का फाइनल था।

जब ऑस्ट्रेलिया में ‘पुजारा’ बने थे दीवार

पुजारा के करियर का शिखर निस्संदेह ऑस्ट्रेलिया में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ जीत थी। 2018-19 में, जब भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट सीरीज़ जीती, तो पुजारा उस जीत के सबसे बड़े नायक थे। उन्होंने 4 टेस्ट मैचों में 521 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ का खिताब जीता था।

उनकी बल्लेबाज़ी सिर्फ रन बनाने के लिए नहीं थी; यह विरोधी टीम के सबसे खतरनाक गेंदबाज़ों को थकाने और उनके मनोबल को तोड़ने की एक रणनीति थी। 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी उन्होंने अपने शरीर पर अनगिनत गेंदें झेलीं, लेकिन क्रीज़ पर डटे रहे और युवा बल्लेबाज़ों के लिए एक मजबूत नींव रखी, जिसके दम पर भारत ने गाबा का किला फतह किया।

टेस्ट के spécialiste, पर सफ़ेद गेंद से रहा फासला

जिस दौर में T20 क्रिकेट का बोलबाला था, पुजारा ने हमेशा लाल गेंद के क्रिकेट को प्राथमिकता दी। उन्होंने एक क्लासिक टेस्ट बल्लेबाज़ की पहचान को जीवित रखा। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए 5 वनडे मैच भी खेले, लेकिन वहाँ उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। आईपीएल में वह कोलकाता नाइट राइडर्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) का हिस्सा रहे, लेकिन उनका बल्ला उस तरह नहीं गरजा जैसा टेस्ट क्रिकेट में गरजता था।

आगे क्या?

क्रिकेट से संन्यास के बाद भी पुजारा खेल से जुड़े रह सकते हैं। हाल के दिनों में उन्हें कई नेटवर्क के लिए क्रिकेट पंडित और कमेंटेटर की भूमिका में देखा गया है। उनका विशाल अनुभव और खेल की गहरी समझ निश्चित रूप से युवा पीढ़ी के काम आएगी।

चेतेश्वर पुजारा का संन्यास केवल एक खिलाड़ी का संन्यास नहीं है, बल्कि यह उस दौर के अंत का संकेत है जहाँ टेस्ट क्रिकेट में विकेट पर टिके रहने की कला को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता था। उनकी विरासत हमेशा उन युवा क्रिकेटरों को प्रेरित करेगी जो क्रिकेट के सबसे शुद्ध प्रारूप में अपना नाम बनाना चाहते हैं।

आपकी क्या राय है? चेतेश्वर पुजारा के करियर की कौन सी पारी आपको सबसे ज्यादा याद है? उनके संन्यास पर अपनी भावनाओं और विचारों को नीचे कमेंट सेक्शन में हमारे साथ ज़रूर साझा करें। हमें आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा

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