सेमीकॉन 2025 में भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति: 2–4 सितंबर 2025 को यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2025 सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 48+ देशों से लगभग 2,500 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, 150 से अधिक वक्ता, और 350 से अधिक प्रदर्शक शामिल हुए।

सेमीकॉन 2025 ‘डिजिटल डायमंड’ — चिप्स की नई पहचान
मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में चिप्स की तुलना “डिजिटल डायमंड” से की, और कहा कि जहाँ बीते सदी को तेल (‘ब्लैक गोल्ड’) ने आकार दिया, वहीं अब चिप्स 21वीं सदी की शक्ति हैं। उन्होंने यह भी कहा, “दुनिया भारत पर भरोसा करती है, विश्व भारत के साथ सेमीकंडक्टर भविष्य का निर्माण करना चाहता है।”
भारत का बाज़ार और वैश्विक स्थिति
भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 2023 में लगभग $38 अरब था, जो 2024–25 में बढ़कर $45–50 अरब तक पहुंच गया है।
अनुमान है कि 2030 तक यह बाज़ार $100–110 अरब तक पहुँच जाएगा।
वैश्विक स्तर पर, सेमीकंडक्टर बाज़ार 2030 तक $1 ट्रिलियन तक पहुंचने की संभावना है।
भारत में लगभग 20% वैश्विक चिप डिज़ाइन इंजीनियर कार्यरत हैं, और देश में सेमीकंडक्टर की खपत 2030 तक $120 अरब से अधिक होने का अनुमान है।
तकनीकी उपलब्धियाँ: Made-in-India चिप और Vikram प्रोसेसर
सम्मेलन में प्रधानमंत्री को भारत निर्मित पहला सेमीकंडक्टर चिप प्रदान किया गया, जो देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी Vikram 32-bit माइक्रोप्रोसेसर प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया—यह उपलब्धि भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
निर्माण परियोजनाएँ और निवेश
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत अब तक 10 सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से कई परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
हाल ही में केंद्र सरकार ने ओडिशा में दो नए प्रोजेक्ट्स को ₹4,009 करोड़ के निवेश के साथ मंजूरी दी है।
नीति, प्रोत्साहन और योजनाएँ
ISM ने ₹76,000 करोड़ के PLI (Production Linked Incentive) कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई है; इसमें अब तक करीब ₹65,000 करोड़ का निवेश हो चुका है।
सरकार ने ESDM (इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग) को “Make in India” अभियान के तहत प्रमुख क्षेत्र घोषित किया है, जिससे नवाचार और उत्पादन को बल मिल रहा है।
विशेषज्ञों और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
सम्मेलन में वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा की प्रशंसा की और कहा कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम केंद्र बनेगा।
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