भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुनावी धांधली के अपने आरोपों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, जिसे ‘वोट चोरी’ का नाम दिया गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में यह अभियान, भारत के चुनाव आयोग (ECI) से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है. इस अभियान के केंद्र में यह मांग है कि ECI डिजिटल वोटर लिस्ट को सार्वजनिक करे ताकि राजनीतिक दल और आम जनता स्वयं उसकी जांच कर सकें.

‘वोट चोरी’ अभियान क्या है?
इस अभियान को गति देने के लिए, कांग्रेस ने एक विशेष वेब पेज, votechori.in, लॉन्च किया है. इस पोर्टल के माध्यम से, कोई भी व्यक्ति अभियान से जुड़ सकता है और तीन मुख्य कार्य कर सकता है: ‘वोट चोरी का सबूत’ डाउनलोड करना, चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करना और चुनावी गड़बड़ियों की रिपोर्ट करना.
पंजीकरण करने वाले लोगों को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अजय माकन द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र भी जारी किया जाता है. इस सर्टिफिकेट पर लिखा है कि वह व्यक्ति “वोट चोरी” के खिलाफ खड़ा है और राहुल गांधी की डिजिटल वोटर रोल की मांग का समर्थन करता है.
कांग्रेस के मुख्य आरोप
राहुल गांधी ने 7 अगस्त, 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को सार्वजनिक किया था. उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एक “बहुत बड़ा आपराधिक फ्रॉड” हुआ है, जिसमें बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत है.
कांग्रेस ने विशेष रूप से कर्नाटक के बैंगलोर सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया. पार्टी का दावा है कि वहां के केवल एक विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से अधिक फर्जी मतदाता पाए गए, जिनकी मदद से बीजेपी ने यह सीट जीती. कांग्रेस के अनुसार, अगर इसी तरह की धांधली देश की 70-100 सीटों पर हुई हो, तो यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को नष्ट कर सकती है. पार्टी का कहना है कि उन्होंने महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी पहले चिंता जताई थी, लेकिन अब उनके पास “सबूत” हैं.
चुनाव आयोग का कड़ा रुख
चुनाव आयोग ने कांग्रेस और राहुल गांधी के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. ECI ने राहुल गांधी को चुनौती दी है कि वे या तो अपने दावों के समर्थन में एक कानूनी घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करें या “फर्जी” आरोप लगाने के लिए देश से माफी मांगें.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन आरोपों को “निराधार” और एक “घिसी-पिटी स्क्रिप्ट” बताया है. ECI ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में सुधार एक नियमित प्रक्रिया है और इसके लिए कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं, जिनका कांग्रेस ने उपयोग नहीं किया. कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने भी राहुल गांधी को नोटिस भेजकर उनके दावों के संबंध में दस्तावेजी सबूत मांगे हैं.
राजनीतिक घमासान और अगला कदम
इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस नेता और समर्थक सोशल मीडिया पर अपने सर्टिफिकेट साझा करके इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं. वहीं, विपक्षी INDIA ब्लॉक ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए 11 अगस्त को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक एक विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी करेंगे. हालांकि, दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है. दूसरी ओर, बीजेपी ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए राहुल गांधी पर एक संवैधानिक संस्था की छवि खराब करने का आरोप लगाया है.
Disclaimer:
यह लेख समाचार एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। चूंकि यह एक विकासशील समाचार है, इसलिए तथ्य और आंकड़े बदल सकते हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों का संदर्भ लें।



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