बिहार में जमीन से जुड़े विवाद और दस्तावेजों की गलतियां एक आम समस्या रही हैं, जिसके लिए लोगों को महीनों तक अंचल और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा-अभियान के तहत इन समस्याओं का समाधान सीधे आपके गांव में ही किया जा रहा है।
खासकर उन लोगों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है, जिनकी जमीन आज भी उनके स्वर्गवासी दादा-परदादा के नाम पर दर्ज है। अब आप आसानी से इसे अपने नाम पर नामांतरण (Mutation) करवा सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह प्रक्रिया कैसे काम कर रही है और आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।

क्या है राजस्व महा-अभियान और जमाबंदी पंजी?
बिहार सरकार ने राज्य भर में भूमि विवादों को कम करने और राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए राजस्व महा-अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, गांव-गांव में शिविर लगाकर रैयतों (भूमि मालिकों) को उनकी जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध कराई जा रही है।
जमाबंदी पंजी एक महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड है, जिसमें आपकी जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां होती हैं, जैसे:
रैयत (मालिक) का नाम
खाता संख्या
खेसरा (प्लॉट) संख्या
रकबा (क्षेत्रफल)
चौहद्दी (जमीन की सीमाएं)
जमीन है पुरखों के नाम, तो कैसे कराएं अपने नाम?
यह एक बहुत ही आम समस्या है कि जमीन दशकों से परिवार के किसी बुजुर्ग (दादा, परदादा) के नाम पर चली आ रही है, जिनका स्वर्गवास हो चुका है। ऐसे मामलों के लिए सरकार ने एक सरल समाधान निकाला है:
सरपंच से बनवाएं वंशावली: राजस्व कर्मचारी अनिल कुमार के अनुसार, यदि आपकी जमीन भी आपके स्वर्गवासी दादा या परदादा के नाम पर है, तो आपको अपने ग्राम पंचायत के सरपंच के पास जाकर एक वंशावली बनवानी होगी।
वंशावली क्या है?: वंशावली एक पारिवारिक वृक्ष (Family Tree) का प्रमाण पत्र होता है, जो यह साबित करता है कि आप उस स्वर्गवासी व्यक्ति के कानूनी उत्तराधिकारी (वारिस) हैं।
नामांतरण के लिए जमा करें: सरपंच द्वारा प्रमाणित इस वंशावली को शिविर में जमा करने पर, जमीन को जीवित उत्तराधिकारियों के नाम पर नामांतरण कर दिया जाएगा।
जमाबंदी में गलती है? ऐसे कराएं सुधार
अभियान के तहत जो जमाबंदी पंजी आपको दी जा रही है, उसमें आपकी जमीन का पूरा ब्योरा दर्ज है। उसके बगल में एक खाली स्थान भी दिया गया है। अगर आपको लगता है कि पंजी में दर्ज किसी भी जानकारी (जैसे नाम, खाता, खेसरा, रकबा) में कोई त्रुटि है, तो:
खाली स्थान में सही जानकारी को साफ-साफ भरें।
अगले शिविर में इस प्रपत्र को जमा कर दें।
सुधार के लिए आवश्यक दस्तावेज:
अपनी जानकारी को प्रमाणित करने के लिए आपको साक्ष्य के रूप में निम्नलिखित दस्तावेजों की फोटोकॉपी संलग्न करनी होगी:
अद्यतन लगान रसीद (ऑनलाइन या ऑफलाइन)
केवाला (बिक्री पत्र) की प्रति
शुद्धि पत्र (यदि कोई हो)
नापी का प्रतिवेदन (यदि लागू हो)
पारिवारिक बंटवारे के बाद जमाबंदी कैसे अलग कराएं?
यदि एक ही जमाबंदी में कई भाइयों का हिस्सा है और परिवार में बंटवारा हो चुका है, तो आप अपनी-अपनी जमाबंदी अलग भी करा सकते हैं। इसके लिए आपको पारिवारिक बंटवारे का कागजात शिविर में जमा करना होगा, जिसके आधार पर सभी भाइयों के नाम से अलग-अलग जमाबंदी कायम कर दी जाएगी।
क्यों खास है यह अभियान?
अरवल जिले के भादासी ग्राम कचहरी में लगे शिविर में पहुंचे रैयतों (राधा मोहन सिंह, विजय प्रसाद यादव) ने बताया कि पहले रकबा, नाम, खाता, खेसरा में सुधार और बंटवारे या नामांतरण जैसे कामों के लिए अंचल कार्यालय के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे। इस अभियान से अब ये सभी काम गांव में ही हो रहे हैं, जिससे न केवल समय और पैसे की बचत हो रही है, बल्कि जमीन विवादों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।



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