रूसी मेगा भूकंप के बावजूद सूनामी से कैसे बचा गया बड़ा नुकसान

रूसी मेगा भूकंप के बावजूद सूनामी से कैसे बचा गया बड़ा नुकसान? जानिए इसके पीछे की वैज्ञानिक वजहें

कमचटका के 8.8 तीव्रता वाले भीषण भूकंप के बाद क्यों नहीं आई विनाशकारी सूनामी? जानिए कैसे समय रहते चेतावनी, भौगोलिक संरचना और समुद्री दिशा ने टाल दी बड़ी तबाही — ‘रिंग ऑफ फायर’ में ये घटना इतिहास में क्यों दर्ज हो गई

रूसी मेगा भूकंप के बावजूद सूनामी से कैसे बचा गया बड़ा नुकसान

30 जुलाई 2025 को रूस के कमचटका प्रायद्वीप में आए 8.8 तीव्रता वाले भूकंप ने पूरे प्रशांत क्षेत्र में सूनामी का खतरा पैदा कर दिया। यह भूकंप प्रशांत महासागर के ‘Ring of Fire’ क्षेत्र में आया, जो पहले भी कई विनाशकारी घटनाओं का गवाह रह चुका है। फिर भी, लाखों की आबादी को सुरक्षित निकालने और सूनामी के सीमित असर ने इस बार के हालात को बदतर होने से बचा लिया। आइए जानते हैं कैसे।

कैसे आया इतना ताकतवर भूकंप?

कमचटका क्षेत्र भूकंप संभावित ‘रिंग ऑफ फायर’ में आता है, जहां टेक्टॉनिक प्लेटें हर साल करीब 8 सेमी सरकती हैं। जब दो प्लेटें टकराकर एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तो गहराई में जमा हुई ऊर्जा एक झटके में निकलती है, जिसे मेगाथ्रस्ट भूकंप कहा जाता है।
यह झटका समुद्र के नीचे करीब 20 किमी गहराई में आया, जिससे महासागर की सतह पर जबरदस्त हलचल हुई।

फिर क्यों नहीं आई भयंकर सूनामी?

  • भूकंप की दिशा और ऊर्जा का बहाव: सूनामी की मुख्य ऊर्जा प्रशांत महासागर की ओर गई, जिससे रूस, जापान, हवाई और अमेरिका के कुछ तटीय हिस्सों में 2 से 4 मीटर की लहरें उठीं, लेकिन ये लहरें ज्यादा ऊंचाई नहीं ले सकीं।
  • समुद्र की गहराई और तटीय संरचना: भूकंप से उत्पन्न ऊर्जा खुले समुद्र में फैल गई। कई तटीय क्षेत्रों की ढलान और समुद्री गहराई ने ऊंची लहरों को बनने से रोका।
  • कम आबादी वाले क्षेत्र: जहां सबसे अधिक लहरें दर्ज की गईं, वे क्षेत्र कम घनी आबादी वाले थे। इस वजह से जान-माल का नुकसान सीमित रहा।
  • बेहतर अलर्ट सिस्टम और निकासी प्रक्रिया: रूस, जापान और अमेरिका ने समय रहते सूनामी अलर्ट जारी किए। लोगों को तुरंत तटीय इलाकों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, जिससे जान बचाई जा सकी।

रिंग ऑफ फायर क्यों है सबसे खतरनाक?

‘Ring of Fire’ वह इलाका है जो प्रशांत महासागर को चारों ओर से घेरे हुए है। यह क्षेत्र दुनियाभर के 75% सक्रिय ज्वालामुखियों और भूकंपों का केंद्र है। यहाँ धरती की प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, जिससे अक्सर तेज़ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।

भविष्य के लिए क्या है तैयारी?

कमचटका का यह भूकंप 1952 के बाद का सबसे बड़ा बताया गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में आफ्टरशॉक्स कई हफ्तों तक आ सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तटीय क्षेत्रों की निगरानी, समय पर अलर्ट और जनता को शिक्षित करने जैसे उपायों पर काम कर रही हैं।

निष्कर्ष

रूसी मेगा भूकंप की तीव्रता जरूर डराने वाली थी, लेकिन सटीक चेतावनी, दिशा का भौगोलिक प्रभाव, समुद्र की संरचना और कम जनसंख्या वाले तटीय क्षेत्रों की वजह से विनाशकारी सूनामी से बचा जा सका। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि विज्ञान, तैयारी और समयबद्ध निर्णय कैसे लाखों ज़िंदगियां बचा सकते हैं।

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