सफलता की कहानियाँ अक्सर हमें प्रेरित करती हैं, लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो सिर्फ प्रेरणा नहीं देतीं, बल्कि यह भी सिखाती हैं कि कैसे एक व्यक्तिगत समस्या को एक बड़े व्यावसायिक अवसर में बदला जा सकता है। ऐसी ही एक असाधारण कहानी है हरियाणा की ग़ज़ल अलघ की, जिन्होंने अपनी पहली नौकरी में ₹1200 प्रतिदिन कमाए और आज वो करोड़ों के ब्रांड ‘मामाअर्थ’ (Mamaearth) की सह-संस्थापक हैं।

यह कहानी सिर्फ एक बिजनेस की नहीं, बल्कि एक माँ की चिंता, दृढ़ संकल्प और एक बाज़ार की ज़रूरत को पहचानने की है। चलिए जानते हैं कैसे एक साधारण शुरुआत से ग़ज़ल अलघ ने भारत के सबसे सफल डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स में से एक की नींव रखी।
कौन हैं ग़ज़ल अलघ? एक साधारण शुरुआत
2 सितंबर, 1988 को हरियाणा के गुरुग्राम में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मीं ग़ज़ल की परवरिश बिल्कुल आम बच्चों की तरह हुई। उन्होंने 2010 में पंजाब यूनिवर्सिटी से सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) में BCA की डिग्री हासिल की। कला में उनकी गहरी रुचि थी, जिसके चलते उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ऑफ़ आर्ट से एक गहन कोर्स भी किया।
अपने करियर की शुरुआत में, उन्होंने आईटी सेक्टर में एक कॉर्पोरेट ट्रेनर के रूप में काम किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उस दौरान वह प्रति दिन लगभग ₹1200 कमाती थीं। यह आंकड़ा आज भले ही छोटा लगे, लेकिन यही उनकी व्यावसायिक यात्रा का शुरुआती बिंदु था।

एक माँ की चिंता जिसने दिया ‘मामाअर्थ’ को जन्म
ग़ज़ल अलघ की ज़िंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह माँ बनीं। उनके बेटे अगस्त्य को जन्म से ही त्वचा संबंधी एक समस्या थी, जिसके कारण उसकी त्वचा बहुत संवेदनशील थी। एक माँ होने के नाते, ग़ज़ल अपने बेटे के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स चाहती थीं जो पूरी तरह से सुरक्षित और टॉक्सिन-फ्री (विष-मुक्त) हों।
उन्होंने भारतीय बाज़ार में ऐसे उत्पादों की बहुत तलाश की, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। बाज़ार में मौजूद ज्यादातर बेबी प्रोडक्ट्स में हानिकारक रसायन थे। मजबूरी में, उन्हें अपने बेटे के लिए विदेश से महंगे प्रोडक्ट्स मंगवाने पड़ते थे। यहीं उन्हें यह अहसास हुआ कि भारत में लाखों माता-पिता इसी समस्या से जूझ रहे होंगे। एक ऐसी जगह की कमी थी जहाँ बच्चों के लिए 100% सुरक्षित प्रोडक्ट्स मिल सकें। इसी ज़रूरत ने ‘मामाअर्थ’ के विचार को जन्म दिया।
₹25 लाख से यूनिकॉर्न बनने का सफर
साल 2016 में, ग़ज़ल ने अपने पति वरुण अलघ के साथ मिलकर इस विचार को हकीकत में बदलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी कंपनी ‘होनासा कंज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड’ (Honasa Consumer Private Limited) की शुरुआत की और ‘मामाअर्थ’ ब्रांड नाम के तहत अपने पहले प्रोडक्ट्स लॉन्च किए।
शुरुआती निवेश: उन्होंने लगभग ₹25 लाख के शुरुआती निवेश के साथ यह सफर शुरू किया।
सबसे बड़ी पहचान: मामाअर्थ एशिया का पहला ऐसा ब्रांड बना जिसे ‘मेडसेफ’ (MadeSafe) सर्टिफिकेशन मिला। यह लेबल उन ब्रांड्स को दिया जाता है जो बच्चों के लिए 100% विष-मुक्त और सुरक्षित उत्पाद बनाते हैं।
तेजी से विकास: देखते ही देखते, मामाअर्थ की लोकप्रियता बढ़ने लगी। बेबी केयर से शुरू होकर, कंपनी ने स्किन केयर, हेयर केयर और कॉस्मेटिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश की। 2022 तक, उनकी पेरेंट कंपनी ‘होनासा’ एक यूनिकॉर्न बन गई, यानी उसकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई। आज होनासा के तहत ‘द डर्मा को’ (The Derma Co.) और ‘बीब्लंट’ (BBlunt) जैसे सफल ब्रांड भी आते हैं।

सफलता का मंत्र: “हर सफल ब्रांड का एक दुश्मन होता है”
ग़ज़ल अलघ, जो लोकप्रिय बिजनेस रियलिटी शो ‘शार्क टैंक इंडिया’ में एक निवेशक और जज के रूप में भी दिखाई दी हैं, मानती हैं कि सफलता का एक खास फॉर्मूला होता है। उन्होंने एक बार सोशल मीडिया पर लिखा था, “सभी सफल ब्रांडों में क्या समानता है? उन सभी का एक दुश्मन होता है। वह दुश्मन हमेशा कोई प्रतियोगी नहीं होता, बल्कि एक सिस्टम, एक मानसिकता या एक समस्या होती है। नेटफ्लिक्स ने केबल टीवी से लड़ाई की, नाइकी ने आत्म-संदेह से, और मामाअर्थ में, हमने जहरीले स्किनकेयर उत्पादों से लड़ाई की।”
उनकी यह सोच दर्शाती है कि उनका लक्ष्य सिर्फ उत्पाद बेचना नहीं था, बल्कि बाज़ार में मौजूद एक बड़ी समस्या का समाधान करना था।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह ब्लॉग पोस्ट सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। हम इसमें दी गई जानकारी की पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते हैं, लेकिन इसे विश्वसनीय स्रोतों से सावधानीपूर्वक संकलित किया गया है।
आपकी राय: ग़ज़ल अलघ की यह प्रेरक कहानी आपको कैसी लगी? क्या आप मानते हैं कि एक व्यक्तिगत समस्या वास्तव में एक बड़े बिजनेस आइडिया को जन्म दे सकती है? अपने विचार नीचे कमेंट सेक्शन में हमारे साथ साझा करें। हमें आपके जवाबों का इंतज़ार रहेगा



Leave a Reply