लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल

लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल पास! असली पैसे वाले गेम्स पर लगेगा बैन, ई-स्पोर्ट्स को मिलेगा खेल का दर्जा

भारतीय गेमिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। बुधवार को लोकसभा ने ‘ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन और विनियमन) विधेयक, 2025’ पारित कर दिया है। इस बिल का सीधा मतलब है कि अब असली पैसे लगाकर कैश जीतने वाले ऑनलाइन गेम्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। यह फैसला देश की 3.8 बिलियन डॉलर (लगभग 31,000 करोड़ रुपये) की गेमिंग इंडस्ट्री को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, जिसमें Dream11, Games24X7 और मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल

सरकार का यह कदम ऑनलाइन गेमिंग की लत, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर मुद्दों से निपटने के लिए उठाया गया है। लेकिन इस बिल में सिर्फ प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि कुछ खेलों के लिए खुशखबरी भी है। तो आखिर क्या है यह नया बिल और इससे आपकी गेमिंग की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? आइए इसे 5 आसान पॉइंट्स में समझते हैं।

1. ई-स्पोर्ट्स के लिए खुशखबरी: अब मिलेगा आधिकारिक खेल का दर्जा

यह इस बिल का सबसे सकारात्मक पहलू है, खासकर प्रोफेशनल गेमर्स के लिए।

  • नई पहचान: ई-स्पोर्ट्स (Esports) को अब भारत में एक आधिकारिक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता दी जाएगी।

  • सरकारी समर्थन: केंद्रीय खेल मंत्रालय भारत में ई-स्पोर्ट्स आयोजनों के लिए दिशानिर्देश और मानक तैयार करेगा।

  • भविष्य की तैयारी: ई-स्पोर्ट्स के लिए ट्रेनिंग अकादमियां, रिसर्च सेंटर और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म स्थापित किए जाएंगे। सरकार ई-स्पोर्ट्स को अपनी व्यापक खेल नीति में एकीकृत करेगी और इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाएगी।

इसका मतलब है कि अब ई-स्पोर्ट्स के खिलाड़ी भी अन्य खिलाड़ियों की तरह सम्मान और सरकारी समर्थन पा सकेंगे।

2. सुरक्षित गेमिंग को बढ़ावा: सोशल और एजुकेशनल गेम्स पर जोर

सरकार हानिकारक गेम्स पर लगाम लगाने के साथ-साथ अच्छे और सुरक्षित गेम्स को बढ़ावा भी देगी।

  • पंजीकरण और वर्गीकरण: सरकार सुरक्षित, उम्र के हिसाब से उपयुक्त और सामाजिक खेलों को “पहचान, वर्गीकृत और पंजीकृत” करेगी।

  • भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता: ऐसे एजुकेशनल और सांस्कृतिक खेलों पर विशेष जोर दिया जाएगा जो भारतीय मूल्यों के अनुरूप हों।

यह कदम बच्चों और युवाओं के लिए एक सुरक्षित ऑनलाइन गेमिंग माहौल बनाने में मदद करेगा।

3. असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध

यह बिल का सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद हिस्सा है।

  • कंप्लीट बैन: ऐसे किसी भी ऑनलाइन गेम को चलाने, ऑफर करने या उसकी सुविधा देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा, जिसमें जीतने के लिए पैसे लगाने पड़ते हों, चाहे वह कौशल (Skill) पर आधारित हो या मौके (Chance) पर।

  • विज्ञापन भी बंद: ऐसे गेम्स का किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन या प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

  • पेमेंट पर रोक: बैंक और पेमेंट सिस्टम को ऐसे गेम्स से जुड़े किसी भी लेनदेन को प्रोसेस करने से रोक दिया जाएगा। मौजूदा ऐप्स को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत ब्लॉक कर दिया जाएगा।

4. निगरानी के लिए बनेगी ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी’

इस पूरे सिस्टम पर नजर रखने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था बनाई जाएगी।

  • अथॉरिटी का गठन: एक ‘राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी’ की स्थापना की जाएगी जो पूरे सेक्टर की निगरानी करेगी।

  • मुख्य कार्य:

    • ऑनलाइन गेम्स का वर्गीकरण और पंजीकरण करना।

    • यह तय करना कि कोई गेम ‘मनी गेम’ की श्रेणी में आता है या नहीं।

    • ऑनलाइन गेम से संबंधित शिकायतों का निपटारा करना।

    • कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश और नियम जारी करना।

5. कड़ी सज़ा और भारी जुर्माना: नियम तोड़ने पर होगी जेल

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए बहुत कड़े दंड का प्रावधान किया है।

  • जेल और जुर्माना: ऑनलाइन मनी गेमिंग में शामिल कंपनियों या व्यक्तियों को 3 साल तक की कैद और/या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

  • विज्ञापन पर सज़ा: ऐसे खेलों का विज्ञापन करने पर 2 साल तक की कैद या 50 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा।

  • दोबारा गलती पर: अपराध दोहराने पर सज़ा और भी कड़ी होगी, जिसमें 3 से 5 साल की जेल और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है।

सरकार ने यह सख्त कदम क्यों उठाया?

सरकारी बयान के अनुसार, “मैनिपुलेटिव डिजाइन फीचर्स और नशे की लत वाले एल्गोरिदम” के कारण कई परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो गए। इसके अलावा, कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म “वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और आतंकी फंडिंग” से जुड़े पाए गए। चूंकि कई ऑपरेटर विदेशों से काम करते हैं, इसलिए उन पर भारतीय कानूनों को लागू करना मुश्किल हो रहा था। इन्हीं कारणों से सरकार ने नियमन के बजाय सीधे प्रतिबंध का रास्ता चुना।

आपकी क्या राय है?

सरकार के इस फैसले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपको लगता है कि असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाना एक सही कदम है? ई-स्पोर्ट्स को खेल का दर्जा मिलने से आप कितने उत्साहित हैं? अपनी राय हमें नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। हम आपके विचारों को सुनना चाहेंगे!

डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखी गई है। बिल के अंतिम कानून बनने पर इसके प्रावधानों में बदलाव संभव है।

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