ऑपरेशन महादेव: पाहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड के खात्मे पर क्या बोले शहीदों के परिवार?

ऑपरेशन महादेव: पाहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड के खात्मे पर क्या बोले शहीदों के परिवार?

“पाहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड की मौत: ‘ऑपरेशन महादेव’ पर शहीदों के परिवारों का दर्द और गर्व – रिश्तेदार बोले, ‘जिन्हें खोया वो वापस नहीं आएंगे, लेकिन सेना की बहादुरी ने दिल को सुकून दिया’; शौर्य की कहानी और न्याय का इंतजार”

ऑपरेशन महादेव: पाहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड के खात्मे पर क्या बोले शहीदों के परिवार?

जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए दर्दनाक आतंकी हमले ने पूरे देश को दहला दिया था। इस हमले में 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी, जिसमें कई महिलाएं, बच्चे और देश के जवान भी शामिल थे। तीन महीने बाद, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत हमले के मास्टरमाइंड सहित तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को एनकाउंटर में मार गिराया। जैसे ही ये खबर आई, शहीदों के परिवारों में एक तरफ राहत की सांस, तो दूसरी तरफ अपनों के खोने का गहरा दर्द फिर ताजा हो गया।

मास्टरमाइंड सुलैमान की मौत से सुकून, पर जख्म अभी ताजा

सेना की खास पैराकमांडो टीम ने सोमवार को श्रीनगर के पास ‘ऑपरेशन महादेव’ में आतंकी सुलैमान उर्फ आसिफ और उसके दो साथियों को ढेर कर दिया। इन्हीं पर 22 अप्रैल की दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम देने का आरोप था। इंदौर के एलआईसी मैनेजर सुशील नाथानिएल के भाई विकास कुमारावत कहते हैं, “हम लगातार सोच रहे थे कि पाहलगाम हमले में शामिल आतंकवादी कब पकड़ेंगे? जैसे ही हमें पता चला कि मास्टरमाइंड को सेना ने मार गिराया, दिल को सकून मिला। हालांकि भाई को खोने का दर्द कभी नहीं भूलेगा, लेकिन हमारी सेना और सरकार का यह कदम काबिल-ए-तारीफ है।”

वीरता के आगे सबको नाज़

हरियाणा के करनाल के रहने वाले नौसेना अधिकारी स्व. लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता, राजेश नरवाल ने मीडिया से बात करते हुए सेना की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं सेना, अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों को सलाम करता हूं। जिस जज्बे से उन्होंने आतंकियों का सामना कर उन्हें मार गिराया, वह आसान काम नहीं था। ऐसे जांबाजों को सम्मान मिलना चाहिए।”

लेफ्टिनेंट नरवाल की शादी के कुछ ही दिन बाद वे पत्नी के साथ हनीमून पर पाहलगाम गए थे, जहां आतंकियों ने बेकसूर पर्यटकों पर गोलियां बरसा दीं। इस हमले में वह भी अपनी जान गंवा बैठे। करनाल से लेकर देश के हर कोने तक, जवान की शहादत को सलाम किया गया।

“जो चले गए, वो लौटेंगे नहीं, पर आतंक का अंत जरूरी”

भुवनेश्वर के रहने वाले पीड़ित प्रशांत सतपथी की पत्नी ने कहा, “जो लोग चले गए, वे कभी वापस नहीं आएंगे, लेकिन आतंक का अंत होना चाहिए। हमें भारतीय सेना पर गर्व है जिसने दुश्मनों का खात्मा किया।”

आतंक के खिलाफ जवाबी कार्रवाई

सेना ने आतंकियों की सैटेलाइट फोन लोकेशन ट्रेस कर ऑपरेशन महादेव चलाया। इसी साल मई में शहीदों का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी चलाया गया था, जिसमें 9 आतंकवादी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की गई थी। ये सभी अभियान देश की सुरक्षा और नागरिकों के मनोबल के लिए बेहद खास हैं।

निष्कर्ष

ऑपरेशन महादेव ने शहीदों के परिवारों को थोड़ी राहत और सुकून जरूर दिया है, लेकिन अपनों को खोने का जख्म कभी नहीं भर सकता। फिर भी, उनकी एक ही उम्मीद है – आतंक का नामोनिशान मिटे और देश में हमेशा अमन-चैन बना रहे। भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान को हर भारतीय का सलाम।

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