सलाकार 2025 समीक्षा

सलाकार 2025 समीक्षा: NSA अजित डोवाल की थ्रिलर क्यों फीकी पड़ी?

सलाकार 2025 समीक्षा

सलाकार वेब सीरीज समीक्षा: एक अधूरी श्रद्धांजलि

सलाकार वेब सीरीज, जो जियोहॉटस्टार पर रिलीज़ हुई है, भारत-पाकिस्तान के परमाणु जासूसी पर आधारित एक स्पाई थ्रिलर है। इसमें नवीन कस्तूरिया और मौनी रॉय मुख्य किरदारों में हैं, जबकि मुकेश रishi और सूर्य शर्मा जैसे कलाकार भी अहम भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर सीरीज की कुल अवधि लगभग 2.5 घंटे है, जिसे पांच एपिसोड्स में बांटा गया है। आज के लंबे वेब सीरीज के दौर में इसका छोटा रनटाइम एक ताज़गी भरा पहलू है, लेकिन इसकी कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाई।

कहानी और पात्रों का संक्षिप्त परिचय

सलाकार की कहानी दो समयावधियों में चलती है—1978 और 2025। 1978 में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अधीर दयाल (नवीन कस्तूरिया) को पाकिस्तान की परमाणु योजनाओं को रोकने के लिए गुप्त मिशन पर भेजा जाता है, जो भारतीय NSA अजित डोवाल से प्रेरित है। 2025 में, RAW एजेंट मरियम (मौनी रॉय) पाकिस्तान में परमाणु खतरे को खत्म करने के मिशन पर होती हैं।

हालांकि विषय देशभक्ति से ओतप्रोत और रोमांचक है, लेकिन पात्र विकास में सीरीज कमजोर पड़ती है। पात्र काफी हद तक सपाट और कहानी के लिए माध्यम मात्र साबित होते हैं।

कमजोरियां और आलोचना

सलाकार की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी पटकथा और यथार्थवाद की कमी है। 1980 के दशक की पुरानी शैली के साथ कई असंगतियां और गलतियां कहानी को कमजोर बनाती हैं। जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों को गलत वाहनों में दिखाना या दूतावास के बजाय हाई कमीशन कह देना। मिशनों को खुले स्थानों पर अंजाम देना भी यथार्थ से मेल नहीं खाता।

सीरीज का टोन भी अनिश्चित है—कभी यह ‘आर्गो’ जैसी गंभीरता लाने की कोशिश करता है तो कभी ‘किंग्समैन’ जैसी हल्की-फुल्की शैली में फंस जाता है। संवादों में व्यंग्य और किरदारों में मजबूती की कमी इसे कमजोर बना देती है।

अभिनय और प्रस्तुति

नवीन कस्तूरिया अपनी भूमिका में सहज और प्रभावशाली हैं, उनकी परफॉर्मेंस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। वहीं, मौनी रॉय का किरदार सीमित और कमजोर लिखावट के कारण पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। मुकेश रishi ने पाकिस्तान के जनरल जिया की भूमिका में जबरदस्त लेकिन कभी-कभी ओवरएक्टिंग की झलक दी। सूर्य शर्मा और अश्वथ भट्ट का प्रदर्शन औसत दर्जे का है।

निष्कर्ष

सलाकार एक देशभक्ति से भरी वेब सीरीज है, जो NSA अजित डोवाल को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है। हालांकि इसमें सही भावना झलकती है, लेकिन कमजोर पटकथा, अधूरे पात्र और यथार्थ से दूर प्रस्तुति इसे औसत बनाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा रनटाइम है, जो दर्शकों की धैर्य को ज्यादा परखा नहीं। बेहतर स्क्रिप्ट और चरित्र विकास के बिना, सलाकार एक प्रभावशाली जासूसी थ्रिलर के रूप में नहीं उभर पाई है।

डिस्क्लेमर: यह समीक्षा व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है। यदि आप इस वेब सीरीज को देखने का मन बना रहे हैं, तो कृपया अपनी पसंद और रुचि के अनुसार निर्णय लें।

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